Tuesday, July 31, 2018

असम .. घुसपैठियों से प्रेम या वोटों की राजनीति

#क्योंकि

"एक भी घुसपैठिया कहीं नहीं जाएगा.... लिख लो!!!"

क्योंकि... जो लोग मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के बाद अपने कर्तव्य की इतिश्री मान लें उनके शत्रु उनसे क्या भयभीत होंगे??? और भयभीत नहीं होंगे तो क्यों जाएंगे???

एक सरकार के तौर पर ४० लाख लोगों की नागरिकता की पहचान ही बहुत बड़ी बात है। उनके वापस भेजने की प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अड़ंगे हैं जो नकारात्मक बुद्धिजीवी समझते हुए भी बताएंगे नहीं.... बस #डोकरी_प्रलाप करेंगे।

सरकार ने एक कदम आगे बढ़कर अपने हिसाब से निर्णय लिया है जो स्वागत योग्य है।
एक समाज के नाते सरकार और प्रधानमंत्री की आलोचनाओं से इतर आपने अपने कर्तव्य का निर्वाह कितना किया????

कोई भी मुसलमान घुसपैठिया बिना लोकल मुस्लिमों के सपोर्ट से किसी नगर में टिक नहीं सकता है।
आपने इनके मददगार अपने देश के मुस्लिमों की सूची तैयार तो कर रखी होगी, है ना???😎
इस सूची को आपने एजेंसियों को भी प्रेषित कर दिया होगा, है ना ???😎
इस सूची में शामिल उन लोगों का आर्थिक बहिष्कार भी एक समाज के तौर पर आप कर ही रहे हैं, है ना ???😎

जर्मनी में तीन चार साल पहले ३१ दिसंबर की रात को पार्टी करके लौट रही कुछ युवतियों के कपड़े फाड़ दिए थे सीरिया के शरणार्थियों ने। तर्क यह था कि ,"इस्लाम के अनुसार औरत यदि ढंकी हुई नहीं है तो फिर वो सार्वजनिक है।"
एंजेला मर्केल की घिग्घी बंध गई थी। किंतु हिटलर के समर्थक राष्ट्रवादियों ने जर्मनी के गुंडों को अपने साथ लिया और जहां मुसलमान नजर आए ठोकना और उनकी महिलाओं को बेइज्जत करना शुरू कर दिया।
आज जर्मनी में ज्यादा फड़ फड़ नहीं कर रहे हैं।

आपके पास भी अघोषित सेना है। आपने रोहिंग्या समस्या से निपटने के लिए उनसे संपर्क कायम तो कर लिया है, है ना???😎

हम सब तो बहुत कुछ कर रहे हैं। बल्कि सबकुछ कर रहे हैं। ये मोदी ही कुछ नहीं कर रहे हैं।😬

देख लेंगे २०१९ में..... है ना 😉

#अज्ञेय

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